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नुसरत फतेह अली खान

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#13oct #16nov नुसरत फ़तेह अली ख़ाँ 🎂जन्म 13 अक्टूबर 1948 जन्म भूमि फ़ैसलाबाद, पाकिस्तान ⚰️मृत्यु 16 अगस्त, 1997 मृत्यु स्थान लंदन, इंग्लैंड अभिभावक फ़तेह अली ख़ाँ कर्म भूमि पाकिस्तान कर्म-क्षेत्र संगीतकार और गायक मुख्य रचनाएँ दमादम मस्त क़लन्दर, छाप तिलक सब छीनी रे, तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी आदि। विषय क़व्वाली, ग़ज़ल प्रसिद्धि सूफ़ी भक्ति संगीत की विधा क़व्वाली के महानतम गायक थे। सक्रिय वर्ष 1965–1997 वाद्य यंत्र हारमोनियम अन्य जानकारी फ़तेह अली ख़ाँ की सबसे बड़ी विशेषता उनका सुरीला सृजन और लगातार गाने की विलक्षण क्षमता थी। फ़तेह अली ख़ाँ को दस घंटे तक लगातार गाने के लिए जाना जाता था। मुस्लिम सूफ़ी भक्ति संगीत की विधा क़व्वाली के महानतम गायक थे। उनके गायन ने क़व्वाली को पाकिस्तान से आगे बढ़कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। क़व्वालों के घराने में फैसलाबाद में जन्मे नुसरत फ़तेह अली ख़ाँ को उनके पिता उस्ताद फ़तेह अली ख़ाँ साहब जो स्वयं बहुत मशहूर और मार्रुफ़ क़व्वाल थे, ने अपने बेटे को इस क्षेत्र में आने से रोका था और खानदान की 600 सालों से चली आ रही परम्परा को तोड...

चित्रगुप्त

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#16nov #14jan  महान संगीतकाऱ चित्रगुप्त के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि चित्रगुप्त श्रीवास्तव  जन्म की तारीख और समय: 16 नवंबर 1917, गोपालगंज मृत्यु की जगह और तारीख: 14 जनवरी 1991, भारत बच्चे: मिलिंद चित्रगुप्त, आनंद चित्रगुप्त 🎂16 नवंबर 1917  ⚰️14 जनवरी 1991 जिन्हें चित्रगुप्त के नाम से जाना जाता है, हिंदी सिनेमा और भोजपुरी सिनेमा में एक भारतीय फ़िल्म संगीत निर्देशक थे उनका जन्म भारत के बिहार राज्य (जो अब गोपालगंज जिले में है) में सारण जिले के एक गाँव सवेरेजी में हुआ था।  वह दो विषयों में स्नातकोत्तर थे।  उनके बेटे आनंद-मिलिंद भी बॉलीवुड के संगीत निर्देशक हैं चित्रगुप्त ने 1946 से 1998 तक लगभग 150 फिल्मों के लिए संगीत की रचना की। इनमें से लोकप्रिय थे ज़बक, भाभी, ऊँचे लोग इंसाफ की मंज़िल और काली टोपी लाल रूमाल मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया गीत "लागी  छूटे ना अब तो सनम" काफी लोकप्रिय हुआ था 1962 में मीना कुमारी और सुनील दत्त अभिनीत फ़िल्म मैं चुप रहूंगी की रिलीज़ के बाद वे वे पूरे देश मे प्रसिद्ध हो गये यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर "सुपर...