संदेश

16 जून लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मानिक ईरानी (बिल्ला)

चित्र
माणिक ईरानी(बिल्ला) 🎂जन्म 23 अक्टूबर 1953 मुंबई, भारत ⚰️मृत 16 जून 1991 अन्य नामों बिल्ला पेशा अभिनेता माणिक ईरानी (जिन्हें बिल्ला के नाम से भी जाना जाता है) एक भारतीय अभिनेता थे, जिन्हें 1980 और 1990 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता था। हिंदी सिनेमा में एक वो दौर भी था जब एक्शन खूब डिमांड में था और निर्माता-निर्देशक भी फिल्मों में जमकर एक्शन परोसते थे। अब चूंकि एक्शन फिल्मों में रखना जरूरी है इसलिए विलेन का होना भी जरूरी है...और इस तरह फिल्मों के विलेन भी अभिन्न हिस्सा बन गए..यानि जितना ज्यादा जरूरी हीरो, उतना ही जरूरी विलेन भी। सुभाष घई की फिल्म 'हीरो' में निभाए बिल्ला नाम के विलेन के किरदार ने माणिक ईरानी को एक नया ही नाम दे दिया था। हालांकि इससे पहले माणिक ने और भी विलेन के किरदार निभाए थे, लेकिन उन्हें नई पहचान मिली फिल्म 'हीरो' से। स्क्रीन पर माणिक के आते ही दहशत फैल जाती थी। लोग उन्हें ऐसे चाव से देखते थे मानों किसी सुपरस्टार को देख रहे हों। माणिक ने 1974 में गुंडे के किरदार से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। ...

हेमंत कुमार भारतीय गायक

चित्र
हेमंत कुमार मुखोपाध्याय  एक प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और फिल्म निर्माता थे। उन्होंने हेमन्त कुमार के नाम से हिंदी फिल्मों में अनेक गीत गाए थे। एक प्रसिद्ध भारतीय संगीत निर्देशक और पार्श्व गायक थे, जिन्होंने मुख्य रूप से बंगाली और हिंदी के साथ-साथ मराठी , गुजराती , उड़िया जैसी अन्य भारतीय भाषाओं में गाया था। , असमिया , तमिल , पंजाबी , भोजपुरी , कोंकणी , संस्कृत और उर्दू. वह बंगाली और हिंदी फिल्म संगीत, रवीन्द्र संगीत और कई अन्य शैलियों के कलाकार थे । उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए थे और उन्हें "भगवान की आवाज़" के रूप में जाना जाता था। 🎂जन्म: 16 जून 1920, वाराणसी ⚰️मृत्यु : 26 सितंबर 1989, कोलकाता पत्नी: बेला मुखोपाध्याय (विवा. 1945–1989) बच्चे: जयन्त मुख़र्जी, रानू मुख़र्जी नातिन या पोतियां: मेघा मुख़र्जी, पायल मुख़र्जी हेमंत का पहला फ़िल्मी गाना 1940 में रिलीज़ हुई बंगाली फ़िल्म राजकुमारेर निर्ब्बासन में था , जिसे एसडी बर्मन ने गाया था । इसके बाद 1941 में निमाई संन्यास हुआ, जिसमें संगीत हरिप्रसन्न दास ने दिया। हेमंत की पहली रचना...