पंडित मलिकार्जुन
महान क्लासिकल गायक पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि 🎂31 दिसम्बर 1910 ⚰️12 सितंबर 1992 वो महान कलाकार जिसे देर से मिली पहचान पर जब मिली तो दुनिया जान गई वो पूरी जिंदगी संगीत में जीते रहे. एक गुरु से दूसरे गुरु, दूसरे से तीसरे गुरु के चरणों में बैठकर स्वरों की साधना करते रहे. अलग-अलग घराने, अलग-अलग अंदाज के रंग सीखते रहे और जब तक संगीत जगत ने उनकी प्रतिभा को सलाम किया तब तक वो जीवन के 60 बसंत देख चुके थे. यानी जब तक संगीत की दुनिया में उन्हें पहचान मिली उनकी उम्र 60 बरस हो चुकी थी. जाहिर है पहचान देर से मिली, लेकिन जब मिली तो ऐसी मिली कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के धुरंधरों में उनका नाम शुमार हो गया. मसलन- भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण से नवाजा. ऐसे थे जयपुर-अतरौली घराने के गायक पंडित मल्लिकार्जुन भीमारायप्पा मंसूर दरअसल, मल्लिकार्जुन मंसूर की गायकी में बिल्कुल अलग कैफियत है. सबसे अलग. नशे में डूबी मतवाली सी आवाज. एक स्वर से दूसरे स्वर की यात्रा कैसे पूरी होती है, आंदोलित होते हुए वो कब मंद्र स्वर से तार सप्तक की ओर बढ़ जाते हैं पत...