ऊषा उत्थुप

ऊषा उत्थुप 
भारत की एक लोकप्रिय पॉप गायिका हैं। उन्हें 1960 के दशक के उतर्राध, 1970 और 1980 के दशक में अपने लोकप्रिय हिट के लिए जाना जाता है। उन्होंने करीब 16 भाषाओं में गाने गाएं हैं जिसमें बंगाली, हिंदी, पंजाबी, असमी, उड़िया, गुजराती, मराठी, कोंकणी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तुलु और तेलुगु शामिल हैं।

🎂जन्म: 07_08 नवंबर 1947  मुम्बई

पति: जानी चक्को उत्थुप
बच्चे: अंजली उत्थुप, सन्नी उत्थुप
माता-पिता: सामी अय्यर
भाई: उमा पोचा, इंदिरा श्रीनिवासन, माया सामी, श्याम अय्यर

ऊषा का जन्म 1947 में तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नै) के एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता सामी अय्यर बाद में बंबई के पुलिस आयुक्त बने। उनकी तीनों बहने उमा पोचा, इंदिरा श्रीनिवासन और माया सामी गायिका हैं और उनके दो भाई भी हैं जिनमें से एक का नाम श्याम है। उनके छह भाई-बहनों में इनका स्थान पांचवां है। बचपन में वो बॉम्बे के बाइकुला के लोवलेन में स्थित पुलिस क्वार्टर में रहती थीं और वहीं के एक स्थानीय स्कूल में पढ़ाई करती थीं।

जब वह स्कूल में थी उन्हें संगीत कक्षा से बाहर निकाल दिया गया था क्योंकि उनकी आवाज़ संगीत के अनुकूल नहीं थी। लेकिन उनके संगीत शिक्षक ने स्वीकार किया कि उनके भीतर कुछ संगीत है और उन्होंने बजाने के लिए उन्हें क्लैपर्स और ट्रैंगल दिया। हालांकि वह औपचारिक रूप से संगीत में प्रशिक्षित नहीं थी, वह संगीत के माहौल में पली-बढ़ी. उनके माता-पिता रेडियो पर किशोरी अमोनकर और बड़े गुलाम अली खान सहित पश्चिमी शास्त्रीय से हिन्दुस्तानी और करनाटिक संगीत की विस्तृत शृंखला को सुना करते थे और वो भी उनके साथ सुना करती थी। . वे रेडियो सीलोन सुनने का आनंद लिया करती थी।

उनके बगल के पड़ोसी एस.एम.ए. पठान थे, जो उस समय पुलिस उपायुक्त थे। उनकी बेटी जमीला ने ऊषा को हिन्दी सीखने, सलवार कमीज़ पहनने और भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखने के लिए प्ररित किया। इस मिश्रित दृष्टिकोण ने उन्हें 1970 के दशक में अपने अनूठे ब्रांड की शुरुआत करने में मदद की। उन्होंने केरल के कोट्टायम के श्री उत्थुप से शादी की।

उनका पहला सार्वजनिक गायन तब हुआ जब वह मात्र नौ वर्ष की थी। उनकी बहन, जो पहले से ही संगीत में अपना कैरियर तलाश रही थी, ऊषा को एक संगीतकार जिनका नाम अमीन सयानी था उनके पास ले गईं, जिन्होंने रेडियो सीलोन के ओवालटाइन म्यूज़िक आवर में गाने का उन्हें एक मौका दिया। उसमें उन्होंने "मॉकिंगबर्ड" नामक गाना गाया. उसके बाद, उन्होंने अपने किशोर समय में कई प्रदर्शन किए।

20 साल की उम्र में उथुप ने साड़ी और लेग कैलिपर पहन कर चेन्नई के माउंट रोड स्थित समकालीन सफायर थियेटर कॉम्प्लेक्स के तहखाने स्थित नाइन जेम्स नामक एक छोटे से नाइटक्लब में गाना शुरू किया। इनकी गायकी की अधिक प्रशंसा के कारण नाइटक्लब के मालिक ने इन्हें एक सप्ताह तक प्रदर्शन करने की अनुमति दी। नाइटक्लब की पहली प्रदर्शन की वाहवाही के बाद इन्होंने मुंबई (तत्कालीन बम्बई) के "टॉक ऑफ द टाउन" (अब नॉट जस्ट जाज़ बाय दि बे) और कलकत्ता के "ट्रिनकस" जैसे नाइटक्लब में गाना शुरू किया। ट्रिनकस में ही अपने भावी पति उथुप से इनकी मुलाकात हुई। ट्रिनकस के बाद, अपने अगले अनुबंध पर इन्हें दिल्ली जाना पड़ा जहां इन्हें होटल ओबेरॉय में गाना था। संयोगवश शशि कपूर सहित नवकेतन इकाई का एक फिल्मी दल नाइटक्लब में आया था। उन्होंने फिल्म के लिए इन्हें पार्श्वगायन की आमंत्रिण दी। परिणाम स्वरूप, इन्होंने फ़िल्म हरे रामा हरे कृष्णा के साथ अपना बॉलीवुड में पार्श्वगायन का आरंभ किया। वास्तव में इन्हें आशा भोसले के साथ गीत "दम मारो दम" गाना था। हालांकि, अन्य गायकों के आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों के फलस्वरूप, इन्होंने यह मौका खो दिया लेकिन उस गीत के अंग्रेजी पंक्तियाँ गाने का अवसर मिला।

इन्होंने 1968 में एक ईपी रिकार्ड पर अंग्रेजी में "जाम्बालया" और द किंग्सटन ट्रायो नामक समूह का "ग्रीनबैक डॉलर" नामक पॉप गानों की रिकॉडिंग की। लव स्टोरी तथा किंग्सटन ट्रायो समूह का अन्य गीत "स्कॉच एंड सोडा" की बिक्री भारतीय बाज़ार में अच्छी हुई। इसके प्रारंभिक समय में इन्होंने लंदन में भी कुछ समय बिताया| ये अक्सर लंदन के लांघम पर स्थित वर्नौन कोरिया के बीबीसी कार्यालय जाया करती थी। लंदन स्थित बीबीसी रेडियो पर "लंदन साउंड्स ईस्टर्न" नामक कार्यक्रम में इनका साक्षात्कार किया गया था।

ऊषा ने एक भारतीय महोत्सव अंतर्गत नैरोबी का दौरा किया। ये इतनी लोकप्रिय हुईं कि इन्हें स्थाई रूप से वहीं रहने का आमंत्रण दिया गया। गायन और स्वाहिली में अक्सर राष्ट्रवादी गीतों के गाने से यें बेहद लोकप्रिय हुईं और तत्कालीन राष्ट्रपति जोमो केन्यात्ता ने इन्हें केन्या का माननीय नागरिक बनाया। इन्होंने मशहूर गीत "मलाइका" (एंजेल) को, इसके मूल गायक, फादिली विलियंस के साथ गाईं| इन्होंने फेलिनी फाइव नामक स्थानीय गान समूह (बैंड) के साथ "लाइव इन नैरोबी" नामक रिकार्ड का निर्माण किया।

उत्थुप ने 1970 और 1980 के दशक में संगीतकार आरडी बर्मन और बप्पी लाहिड़ी के लिए कई गाने गाए| इन्होंने अन्य गायकों द्वारा गाए आरडी बर्मन के "मेहबूबा मेहबूबा" और "दम मारो दम" जैसे कुछ गीत फिर से गईं जो काफी लोकप्रिय हुए|

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विकेट बचा" (विथ अर्ल) हैट्रिक 2007 प्रीतम
"तेरी मेरी मैरी क्रिसमस" बो बैरक्स फोरएवर 2007 अन्जन दत्त
"कभी पा लिया तो कभी खो दिया" जॉगर्स पार्क 2003 तबुन
"दिन है ना ये रात" भूत 2003 सलीम सुलेमान
"वंदे मातरं" कभी ख़ुशी कभी ग़म 2001 जतिन-ललित, सन्देश शांडिल्य, आदेश श्रीवास्तव
"राजा की कहानी" गौडमदर 1999 विशाल भारद्वाज
"दौड़" दौड़ 1998 ए.आर. रहमान
"वेगम वेगम पोगुम पोगुम" अंजलि 1991 इल्याराजा
"कीचुराल्लू" कीचुराल्लू 1991 इल्याराजा
"कोई यहां अहा नाचे नाचे " डिस्को डांसर 1982 बप्पी लाहिड़ी
"रम्बा हो" अरमान 1981 बप्पी लाहिड़ी
"हरि ओम हरि" प्यारा दुश्मन 1980 बप्पी लाहिड़ी
"तू मुझे जान से भी प्यारा है" वारदात 1981 बप्पी लाहिड़ी
"दोस्तों से प्यार किया " शान 1980 आरडी बर्मन
"शान से ..." शान 1980 आरडी बर्मन
"एक दो चा चा चा" शालीमार 1978 आरडी बर्मन

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