हिंदू राष्ट्र

क्या भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है?
अभी तक तो नहीं

भारत को भारतीय संविधान ने "धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र" घोषित किया है, न कि हिंदू राष्ट्र। भारत के संविधान में 42वें संशोधन (1976) के बाद "धर्मनिरपेक्ष" शब्द जोड़ा गया, जिसका अर्थ है कि भारत का कोई
आधिकारिक या राजधर्म नहीं है और सभी धर्मों को समान अधिकार एवं सम्मान प्राप्त हैं।

इस बारे में संविधान क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 25-28 के तहत भारत में हर नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता है।

फिर बंगाल , काश्मीर में हिंदू पर अत्याचार होना ही नहीं चाहिए था

कि कभी हिंदू राष्ट्र की मांग हिंदू समाज करे?

जब संविधान उनकी रक्षा नहीं कर सका तो सनातनी हिंदू राष्ट्र की मांग उठ खड़ी हुई

जब कि भारत की प्रस्तावना ("प्रीएम्बल") में “धर्मनिरपेक्ष” (Secular) शब्द स्पष्ट रूप से शामिल है।
संविधान के अनुसार, राज्य किसी विशेष धर्म को बढ़ावा नहीं देता, न ही देश का कोई "सरकारी धर्म" है; बल्कि राज्य सभी धर्मों के प्रति निष्पक्ष रहता है।

जब राष्ट्रीय संविधान राज्यों का संविधान उनकी रक्षा करने में असफल सिद्ध हुआ तो सनातन धर्म वालों ने हिंदू राष्ट्र की मांग उठा दी

सनातनी अर्थात सनातन धर्म के चार वर्ग हैं

(1) सनातनी हिंदू*
(2) सनातनी मुसलमान
(3) सनातनी सिख
(4) सनातनी ईसाई

जब इन चारों के धार्मिक हितों की रक्षा करने में भारतीय और राज्य सरकारों द्वारा असफलता दिखाई गई तो हिंदू राष्ट्र की मांग ने जन्म ले लिया

 इस प्रकार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाया जा सकता है?

पर अभी तक- भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की कोई सरकारी घोषणा नहीं हुई है और न ही संसद या कैबिनेट ने ऐसा कोई प्रस्ताव ही पारित किया है।
कई भारतीय समूह और नेता समय-समय पर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की वकालत जरूर करते हैं,
 लेकिन ऐसी कोई संवैधानिक या कानूनी स्थिति वर्तमान में नहीं है।
आरएसएस जैसे संगठनों के अनुसार भारत की संस्कृति हिंदू मूल की है, लेकिन वे भी इसे सांस्कृतिक अर्थों में मानते हैं, न कि संविधानिक या राजकीय रूप में।

भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता सुनिश्चित करता है।

 संविधान में

"धर्मनिरपेक्ष" (Secular) शब्द 1976 में 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया था।

 इसका अर्थ यह है कि भारत का कोई राजधर्म नहीं है और राज्य सभी धर्मों के प्रति निष्पक्ष और समान व्यवहार करता है।

भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षतासंविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक हर नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता दी गई है।राज्य किसी भी धर्म विशेष का पक्ष नहीं लेता और न ही कोई सरकारी धर्म होता है।प्रस्तावना सहित संविधान का यह केंद्रीय सिद्धांत है कि भारत के सभी नागरिकों को उनकी धार्मिक आस्था, विश्वास और उपासना की पूर्ण आज़ादी मिले

इस लिए हिंदू राष्ट्र की मांग भी जायज ही है
धीरेन्द्र शास्त्री की हिंदू राष्ट्र पद यात्रा को समर्थन भी सभी को मिल भी रहा है

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