निर्मल उधास
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निर्मल उधास
जन्म 5 नवंबर 1944
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निर्मल उधास एक ग़ज़ल गायक हैं और उधास भाइयों के दूसरे भाई हैं, अन्य मनहर उधास और पंकज उधास हैं। वे गुजरात, भारत में एक विनम्र पृष्ठभूमि से आए थे। निर्मल का जन्म केशुभाई उधास और जीतूबेन उधास के जेतपुर में 5 नवंबर 1944 को हुआ था।
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निर्मल उधास एक ग़ज़ल गायक हैं और उधास बंधुओं के दूसरे भाई हैं, अन्य हैं मनहर उधास और पंकज उधास । वे भारत के गुजरात में एक साधारण पृष्ठभूमि से आये थे । निर्मल का जन्म 05 नवंबर 1944 को जेतपुर में केशुभाई उधास और जितुबेन उधास के घर हुआ था ।
फिल्मों के गाने जब भी हिट होते हैं तो उन्हें खूब सुना जाता है, लेकिन अक्सर उसे किसने गाया है यह बहुत कम लोगों को पता होता है. पहले के दौर में भी ऐसे बहुत से गायक रहे हैं, जिनकी आवाज से सजा हर गाना जादू बिखेर दिया करता था. पुराने दौर के गायकों में एक ऐसा ही मखमली आवाज का सिंगर था, जिसने एक से बढ़कर एक बेहतरीन गाने गाए. अपने नाम कई रिकॉर्ड भी दर्ज किए लेकिन वह इंडस्ट्री में ज्यादा मुकाम हासिल नही कर सक. हम बात कर रहे हैं फेमस सिंगर ‘मनहर उधास’ (Manhar Udhas) की.
मनहर उधास का जन्म राजकोट, गुजरात में 13 मई 1943 को हुआ था. मनहर के दो भाई हैं पंकज और निर्मल उधास. मनहर अच्छे परिवार से ताल्लुक रखते थे और उनके पिता चाहते थे कि वे पढ़ लिखकर अच्छी जॉब करें. ऐसे में मनहर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और मुंबई जॉब की तलाश में चले गए. लेकिन संगीत को लेकर बचपन से ही मनहर की रुचि थी. मनहर सहगल (Sehgal) साहब के बहुत बड़े फैन थे और अक्सर उनके गाने सुना करते थे.
रफी साहब ने पहचाना टैलेंट
मनहर के ब्रदर इन लॉ गुजराती फिल्मों से जुड़े थे. उन्होंने ही एक दफा मनहर को फेमस संगीतकार जोड़ी कल्याणजी आनंदजी से मिलवाया था. उन्हें मनहर की आवाज पसंद आई और उन्होंने कोरस सिंगर की टीम में उन्हें शामिल कर लिया. एक बार जब वे मोहम्मद रफी साहब के पीछे गाना गा रहे थे तो उन्होंने कल्याणजी आनंदजी से कहा कि इसकी आवाज में दम है और इसे एक अंतरा गाने के लिए दीजिए. इसके बाद फिल्म ‘राजा साहब’ में मनहर को गाने का मौका दिया गया और यहीं से उनका कॅरियर सिंगर के तौर पर शुरू हो गया.
जो मिला बस दिल से गा दिया…
‘हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे’, ‘हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में’, ‘ये इलू इलू क्या है’, ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल’ जैसे कई बेहतरीन गाने हैं, जिन्हें मनहर ने आवाज दी है. एक वक्त पर तो बॉलीवुड में उनका ही सिक्का चलने लगा था और हर दूसरी फिल्म में उनका एक हिट गाना होता था. लेकिन इसके साथ ही मनहर गुजराती और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के गाने भी गाते थे. साथ ही भजन गाने के साथ ही विदेशों में शोज भी किया करते थे. सरल स्वभाव वाले मनहर को कभी भी फेम की भूख नहीं रही. बॉलीवुड के बेहतरीन गाने के बावजूद उन्होंने कभी किसी का चापलूसी नहीं की. उनके सामने जो बेहतर प्रस्ताव आए उन्होंने किए. यही कारण रही कि वे चकाचौंध भरी मनोरंजन की दुनिया में गुमनाम से रहे.
वहीं, दूसरी तरफ उनके छोटे भाई पंकज उधास ने मनोरंजन की दुनिया में गजल गायक के तौर पर काफी प्रसिद्धी हासिल की.
मनहर ने बताया लता जी ने ही एसडी बर्मन से उनसे गीत सुनने के लिए कहा था। इसके बाद तो मनहर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 450 हिंदी फिल्मों में गीत गाए। मनहर ने कहा कि लता के साथ अभिमान फिल्म के लिए गाना आज भी सपने जैसा है। लता जी स्वयं एक संस्थान हैं।
अचानक साईं भजन गाने को मिला ऑफर
मनहर उधास ने कहा कि मेरा फिल्मी कैरियर उस समय ऊंचाई पर था। अचानक के राजदान ने मुझसे साईं भजन गाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उनका साई भजन गायन के प्रति रुझान नहीं था।जो सनातन परंपरा का अंग नही।पर पापी पेट और ख्याति हेतु गा दिए।मगर, साईं की ऐसी कृपा हुई कि मैंने साईं के भजनों की पहली एलबम ‘साईं अर्पण’ तैयार की। इसके बाद लगातार भजनों की 30 एलबम रिकार्ड की। जब वो31वीं एलबम रिकार्ड कर रहे थे तो। उनका मेरे से कहना था कि साईं बाबा के आशीर्वाद से ही असफलता मिली।अपने भीतर की गायन कला को खुल कर सब के सामने प्रस्तुत नही कर सका।
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