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rk नारायण

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आर॰ के॰ नारायण  रासीपुरम कृष्णस्वामी अय्यर नारायणस्वामी 🎂जन्म10 अक्टूबर 1906 मद्रास, ब्रिटिश भारत ⚰️मौत13 मई 2001 चेन्नई पेशा लेखक राष्ट्रीयताभारतीय विधा उपन्यास, कहानी एवं अकाल्पनिक गद्यवृत्त उल्लेखनीय कामs 'गाइड', 'मालगुडी का आदमखोर'। खिताब पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार, AC Benson Medal. रिश्तेदारआर के लक्ष्मण (भाई) इनका पूरा नाम राशीपुरम कृष्ण स्वामीनारायण था। इसमें पारंपरिक पारिवारिक उपाधि 'अय्यर' जोड़कर भी उनका नाम लिया जाता है। नारायण के पिता एक तमिल अध्यापक थे, जिन्होंने अपना अधिकांश समय मैसूर के शांत शहर में बिताया था। नारायण ने भी बहुत थोड़े समय के लिए एक अध्यापक तथा पत्रकार के रूप में कार्य करने के सिवा अपना सारा जीवन लेखन में ही लगाया। आर॰ के॰ नारायण मैसूर के यादवगिरि में करीब दो दशक तक रहे। 1990 में बीमारी की वजह से वे चेन्नई शिफ्ट कर गये थे। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास गाइड के लिये उन्हें सन् 1960 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रचनात्मक परिचय उन्होंने एक काल्पनिक शहर मालगुडी को आधार बनाकर अपनी अनेक रचनाएँ की है...

यमुना बरुआ

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जमुना बरुआ  एक प्रमुख भारतीय अभिनेत्री थीं। 🎂जन्म: 10 अक्तूबर 1919, आगरा ⚰️मृत्य: 24 नवंबर 2005, कोलकाता बच्चे: देब कुमार बरुआ, प्रसून बरुआ, रजत बरुआ माता-पिता: पूरन गुप्ता बहन: गंगा, भागीरती पति: प्रमथेश बरुआ प्रारंभिक जीवन जमुना भारत के आगरा के पास एक गाँव के निवासी पूरन गुप्ता की छह बेटियों में से चौथी थीं। प्रत्येक बहन का नाम किसी भारतीय नदी जैसे गंगा, जमुना, भागीरथी आदि के नाम पर रखा गया था। नियति के अनुसार, जमुना भारत के एक प्रमुख फिल्म निर्माता शहर कलकत्ता में रहने आई। मूल रूप से असम के गोलपारा जिले (अविभाजित) के गौरीपुर की रहने वाली जमुना की शादी प्रसिद्ध अभिनेता निर्देशक प्रमथेश बरुआ या पीसी बरुआ से हुई थी, जिनकी 1950 में मृत्यु हो गई। उन्होंने अपने पति के प्रसिद्ध प्रोडक्शन देवदास से अपना अभिनय करियर शुरू किया। 1936 में और फिल्म की मुख्य किरदार पार्वती या पारो थीं . उन्होंने बंगाली और हिंदी में कई यादगार फिल्में बनाईं , जिनमें अमीरी , मुक्ति , अधिकार और शेष उत्तर प्रमुख हैं । बरुआ की मृत्यु के बाद उन्होंने अभिनय करना बंद कर दिया। फ़िल्मी करियर जमुना ने 1930 क...

आर के नारायण

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माला गुड़ी डेज आर॰ के॰ नारायण  रासीपुरम कृष्णस्वामी अय्यर नारायणस्वामी 🎂जन्म10 अक्टूबर 1906 मद्रास, ब्रिटिश भारत ⚰️मौत13 मई 2001 चेन्नई पेशा लेखक राष्ट्रीयताभारतीय विधा उपन्यास, कहानी एवं अकाल्पनिक गद्यवृत्त उल्लेखनीय कामs 'गाइड', 'मालगुडी का आदमखोर'। खिताब पद्म विभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार, AC Benson Medal. रिश्तेदारआर के लक्ष्मण (भाई) इनका पूरा नाम राशीपुरम कृष्ण स्वामीनारायण था। इसमें पारंपरिक पारिवारिक उपाधि 'अय्यर' जोड़कर भी उनका नाम लिया जाता है। नारायण के पिता एक तमिल अध्यापक थे, जिन्होंने अपना अधिकांश समय मैसूर के शांत शहर में बिताया था। नारायण ने भी बहुत थोड़े समय के लिए एक अध्यापक तथा पत्रकार के रूप में कार्य करने के सिवा अपना सारा जीवन लेखन में ही लगाया। आर॰ के॰ नारायण मैसूर के यादवगिरि में करीब दो दशक तक रहे। 1990 में बीमारी की वजह से वे चेन्नई शिफ्ट कर गये थे। इनके द्वारा रचित एक उपन्यास गाइड के लिये उन्हें सन् 1960 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रचनात्मक परिचय उन्होंने एक काल्पनिक शहर मालगुडी को आधार बनाकर अपनी अन...

जगजीत सिंह

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महान ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि 🎂जन्म: 08 फ़रवरी 1941, श्रीगंगानगर ⚰️मृत्यु: 10 अक्तूबर 2011, Lilavati Hospital And Research Centre, मुम्बई पत्नी: चित्रा सिंह (विवा. 1969–2011) बच्चे: विवेक सिंह, मोनिका चौधरी माता-पिता: बच्चन कौर, अमर सिंह भाई: इंदरजीत कौर, करतार सिंह, जसवंत सिंह जगजीत सिंह ग़ज़लों की दुनिया के बादशाह और अपनी सहराना आवाज़ से लाखों-करोड़ों सुनने वालों के दिलों पर राज करने वाले प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक थे।खालिस उर्दू जानने वालों की मिल्कियत समझी जाने वाली.. नवाबों, रक्कासाओं की दुनिया में झनकती और शायरों की महफ़िलों में वाह-वाह की दाद पर इतराती ग़ज़लों को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह जगजीत सिंह हैं। उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो- शायरी की समझ में इज़ाफ़ा कियाबल्कि ग़ालिब, मीर , मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया। हिंदी, उर्दू, पंजाबी , भोजपुरी सहित कई जबानों में गाने वाले जगजीत सिंह को साल 2003 में भारत सरकार के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मभूषण से नवा...

रूबी मेयर्स उर्फ सलोचना

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अभिनेत्री रूबी मेयर्स  उर्फ सुलोचना की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि रूबी मेयर्स या सुलोचना  🎂जन्म: 1907, ⚰️ मृत्यु: 10 अक्टूबर, 1983  1930 के दशक में सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री थी। 1930 के दौर में सुलोचना इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री की शीर्ष अभिनेत्री थीं। उन्होंने शुरुआत तो मूक फ़िल्मों के समय से की, लेकिन बोलती फ़िल्मों के दौर की शुरुआत में भी उनका सिक्का फ़िल्म इंडस्ट्री पर खूब चला। हिन्दी सिनेमा में विशेष योगदान के लिए 1973 में 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। मूक फ़िल्मों के दौर में ही सुलोचना के खाते में कई हिट फ़िल्में थीं। बोलती फ़िल्मों के आने के बाद सुलोचना का कॅरियर थोड़ा ठहर गया। सुलोचना असल में क्रिश्चियन थीं और उन्हें ‘हिन्दुस्तानी’ भाषा बहुत अच्छे से नहीं आती थी। बोलती फ़िल्मों के आने के साथ ही डायलॉग बोलने की दक्षता ज़रूरी हो गई। ये सुलोचना के कॅरियर के लिए एक धक्का था। कुछ वक्त ऐसे ही चला, मगर फिर सुलोचना ने हार ना मानने का फैसला लिया। उन्होंने एक साल का ब्रेक लेकर हिन्दुस्तानी धड़ल्ले से बोलने की तालीम ली और फिर वापसी की। सब...

गुरुदत

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महान अभिनेता निर्माता निर्देशक गुरुदत्त की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि 🎂जन्म 09 जुलाई 1925 ⚰️10 अक्टूबर 1964 गुरु दत्त वास्तविक नाम: वसन्त कुमार शिवशंकर पादुकोणे, हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता,निर्देशक एवं फ़िल्म निर्माता थे। उन्होंने 1950वें और 1960वें दशक में कई उत्कृष्ट फिल्में बनाईं जैसे प्यासा,कागज़ के फूल,साहिब बीबी और ग़ुलाम और चौदहवीं का चाँद। विशेष रूप से, प्यासा और काग़ज़ के फूल को टाइम पत्रिका के 100 सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की सूचि में शामिल किया गया है और साइट एन्ड साउंड आलोचकों और निर्देशकों के सर्वेक्षण द्वारा, दत्त खुद भी सबसे बड़े फिल्म निर्देशकों की सूचि में शामिल हैं। उन्हें कभी कभी "भारत का ऑर्सन वेल्स" (Orson Welles) ‍‍ भी कहा जाता है। 2010 में, उनका नाम सीएनएन के "सर्व श्रेष्ठ 25 एशियाई अभिनेताओं" के सूचि में भी शामिल किया गया। गुरु दत्त 1950वें दशक के लोकप्रिय सिनेमा के प्रसंग में, काव्यात्मक और कलात्मक फिल्मों के व्यावसायिक चलन को विकसित करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी फिल्मों को जर्मनी, फ्रांस और जापान में अब भी प्रकाशित करने ...

रेखा

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नाम :-रेखा जन्म का नाम :- भानुरेखा जेमिनी गणेशन निक नाम :- बॉलीवुड क्वीन रे मैडम एक्स रेखाजी जन्मतिथि :- 10 अक्टूबर 1954 ऊँचाई :- 1.65 मी ट्रेड मार्क :- उसकी मोहक आवाज , उसकी मंत्रमुग्ध कर देने वाली आंखें हैं जिनका उपयोग वह विनाशकारी प्रभाव के साथ करती है मिनी बायो:- भानुरेखा गणेशन, जिन्हें उनके स्टेज नाम रेखा से बेहतर जाना जाता है (जन्म 10 अक्टूबर 1954) एक बॉलीवुड भारतीय अभिनेत्री हैं। रेखा ने अपने 40 साल से अधिक लंबे करियर में 180 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। अपने पूरे करियर में, उन्होंने अक्सर मजबूत महिला किरदार निभाए हैं और मुख्यधारा के सिनेमा के अलावा, कला-घर की फिल्मों में भी दिखाई दीं, जिन्हें भारत में समानांतर सिनेमा के रूप में जाना जाता है। उन्होंने तीन फिल्मफेयर पुरस्कार जीते हैं, दो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए और एक सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए, ख़ूबसूरत (1980), ख़ून भरी माँग (1988) और खिलाड़ियों का खिलाड़ी (1996) में उनकी भूमिकाओं के लिए। उमराव जान (1981) में एक शास्त्रीय वेश्या के उनके चित्रण ने उन्हें सर...